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बुलाहट की पहचान!

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 Check your calling अपनी बुलाहट को जांचे अगर आपको यक़ीनन परमेश्वर की बुलाहट है, बुलाहट यानी वही आवाज़ जिसको केवल वही समझता है जिसको वो सुनाई दी थी, जी हाँ वही मीठी धीमी इत्मीनान से भरी पवित्र आत्मा की आवाज़, इस भावना को वही समझ सकता है जो बुलाहट से है, जो आपको प्रेरित करती है कुछ इन बातों को करने के लिए: 1. यीशु मसीह की गवाही दे (Apostalic Ministry)  2. उठ मेरी सेवा कर(Pastoral Ministry) 3. प्रेरिताई कर (Evangelism) 4. जीवन बचा (Teaching/Healing Ministry) 5. भविष्यवाणि कर (Prophetic Ministry) 6. प्रबंधक व दान की सेवा कर ( Service of Management & Charity) etc..... अगर ऐसा नहीं हुआ है और आप सेवा करने के लिए आँख बंद करके निकल गए तो आपको सख्त प्रार्थना व किसी अभिषेक्त परमेश्वर के दास के परामर्श को ज़रूर लेना चाहिए। पर अगर आपको यक़ीनन परमेश्वर की बुलाहट है तो आप इन बातों से अपने को जाँच सकते हैं  1. आप अपना पवित्र शास्त्र ज़रूर अध्ययन करेंगे और 2. प्रार्थना में वक़्त व्यतीत करेंगे 3. परमेश्वर की इच्छा से ही एक एक कदम बढ़ाकर सेवा करेंगे अपनी इच्छा से सेवाकाई में आपको बहुत प्रार्थना...

अध्याय 5 BASIC FACTS OF THE PRAYER (प्रार्थना के तथ्य)

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  अध्याय 5 BASIC FACTS OF THE PRAYER प्रार्थना के तथ्य प्रस्तावना: हमने पिछले अध्याय में मनन किया की प्रार्थना के मूल तत्व (Basic elements) क्या है और हमने यह भी मनन किया था कि आप अपने प्रार्थना करने के तरीके को न बदलें वरन यह पाठ्यक्रम आपके मसीही जीवन में आत्मिक उन्नति को बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। आपका प्रार्थना का जीवन आपका संबंध परमेश्वर के साथ मजबूत करता है इस अध्याय में हम प्रार्थना के तथ्यों पर मनन करेंगे जो हमें सिखाएंगे कि हमारी प्रार्थना परमेश्वर कब सुनते हैं और कब पूरा करते हैं।  यह तथ्य पवित्र शास्त्र बाइबल के हैं जिन्हें न सिर्फ हमें पता होना चाहिए परंतु इन बातों को हमें प्रतिदिन अपने जीवन में अमल करना चाहिए।  यह सच है कि एक मसीही जीवन प्रार्थना का जीवन है पर हमारा प्रार्थना का वक्त हमारे अनंत जीवन में परमेश्वर के साथ रहने में बहुत सहायता करेगा। पृथ्वी पर जितना वक्त मनुष्य परमेश्वर के बिना व्यतीत करता है उतना ही परमेश्वर के बिना अनंत जीवन में वक्त बिताना पड़ेगा। यह एक कड़वा सच है।  प्रार्थना के जीवन में हमें कुछ खास विशेष बातों का ख्याल रखना पड़ता ...

अध्याय -4 प्रार्थना के मूल तत्व

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  अध्याय -4 प्रार्थना के मूल तत्व Basic Elements of Prayer प्रस्तावना- जब आपने प्रभु यीशु मसीह को स्वीकार किया होगा आपको बताया गया होगा कि हम प्रार्थना करते हैं। प्रार्थना हम सबके आत्मिक जीवन में एक विशेष स्थान रखती है। आइए प्रार्थना को अब हम विस्तार से अध्ययन करेंगे जो एक दिलचस्प और महत्वपूर्ण विषय है। कोई भी व्यक्ति जन्म से प्रार्थना करने नहीं लगता पर यह परमेश्वर की इच्छा पर निर्भर करता है कि वह व्यक्ति परमेश्वर की नजदीकी में प्रभु येशु मसीह के नाम से आए और जब वह अविश्वासी सच्चे परमेश्वर को अपने बनाने वाले को पहचान जाता है तब खुद पवित्र आत्मा घुटनों पर उसे ले जाकर उसे प्रार्थना सिखाते हैं। जो आपका प्रार्थना करने का तरीका है आप उसे न बदलें इस पाठ्यक्रम के इस विशेष अध्याय का मकसद आपके प्रार्थना में जीवन को और अधिक मजबूत वह प्रभावशाली बनाना है। इस पाठ्यक्रम के द्वारा इस विशेष अध्याय के माध्यम से आप अपनी प्रार्थना में कुछ खास बातें जोड़कर एक प्रभावशाली प्रार्थना कर पाएंगे। प्रार्थनामय जीवन के कुछ मूल तत्व हैं जो परमेश्वर के वचन से ही हैं, हम मनन करेंगे। "दुआ" "प्रार्थना...

अध्याय 3 नए विश्वासीयो के प्राथमिक कार्य Do's for the New believers

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 अध्याय 3  नए विश्वासीयो के प्राथमिक कार्य  Do's for the New believers प्रभु यीशु मसीह ने आपसे इतना प्यार किया है कि आप उसे अपनी समझ से समझ नहीं सकते। जितना उसने अपना प्रेम प्रकट किया है उसी महान प्रेम के द्वारा आप बचाए गए हैं। उसने अपनी जान आपके परिवार को बचाने के लिए दे दी ताकि आपको अनंत जीवन में मरना न पड़े। परंतु आप उसके साथ हमेशा तक जीवित रहेंगे।आपको अपने नए विश्वासी जीवन में क्या करना है हम पांच खास बातों से सीखेंगे। 1. Regular connection with God in prayer: नये विश्वासी जीवन निरंतर परमेश्वर के साथ बने रहें उससे दूर न हो और उसका सरल माध्यम है कि आप प्रार्थना में प्रतिदिन अपना वक्त बताएं। यह सच है कि कभी-कभी प्रार्थना का जीवन चिंताओं से और अपने परिवार की जरूरतों को और सुबह से लेकर शाम तक का परिश्रम और अपने सांसारिक कार्य को पूरा करने के अभाव के कारण कमजोर पड़ जाता है। प्रार्थना करना मसीही जीवन के लिए उतना ही जरूरी है जितना आपके शारीरिक विकास की प्रचुर मात्रा में विटामिंस की जरूरत होती है और उसमें से एक भी कम हो जाए तो कोई भी डिफिशिएंसी सिंड्रोम या शरीर की रोग प्रतिरो...

नये विश्वासियों के प्राथमिक कार्य (Don'ts for New believers आप क्या न करें।) अध्याय 2

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  अध्याय 2 नये विश्वासियों के प्राथमिक कार्य आप क्या न करें Don'ts for New believers  भाग (क) Don'ts for New believers आप क्या  न करें। जय मसीह की🙏 मैं पास्टर विवेक साइमन दूसरे अध्याय के भाग (क) में आपका स्वागत है। सबसे पहले तो मैं आपको बता दूं कि परमेश्वर ने आपको इसलिए बनाया है क्योंकि वे आपसे प्यार करते हैं। वरना सैकड़ों जीवन सत्य के प्रकाश से बाहर अंधकार में अपना जीवन जी रहे हैं और हजारों उस अंधकार में ही मिट्टी में मिल जाते हैं। अगर आप प्रभु यीशु मसीह के करीब आ पाए हैं तो यह आपका अपना चुनाव नहीं है बल्कि यह परमेश्वर चाहते थे। बाइबल बताती है कि जब तक किसी को पिता की ओर यह वरदान न दिया जाए तक तक वह मेरे पास नहीं आ सकता। यूहन्ना 6:65 प्रभु यीशु मसीह को ग्रहण करने के बाद आपको धीरज के साथ परमेश्वर की इच्छा पूरी करनी है। और उसकी इच्छा यह है कि आपको अपने को प्रभु यीशु मसीह की समानता में तराशना है छांटना है, एक अनोखा परमेश्वर का सिद्ध जन बनकर मसीह के स्वरूप में तैयार होना है ताकि आप उसके सम्मुख खड़े होकर अंत में उस इंटरव्यू को पास कर सकें जिसे बाइबल की भाषा में में "लेखा दिय...