बुलाहट की पहचान!

 Check your calling अपनी बुलाहट को जांचे


अगर आपको यक़ीनन परमेश्वर की बुलाहट है, बुलाहट यानी वही आवाज़ जिसको केवल वही समझता है जिसको वो सुनाई दी थी, जी हाँ वही मीठी धीमी इत्मीनान से भरी पवित्र आत्मा की आवाज़, इस भावना को वही समझ सकता है जो बुलाहट से है, जो आपको प्रेरित करती है कुछ इन बातों को करने के लिए:

1. यीशु मसीह की गवाही दे (Apostalic Ministry) 

2. उठ मेरी सेवा कर(Pastoral Ministry)

3. प्रेरिताई कर (Evangelism)

4. जीवन बचा (Teaching/Healing Ministry)

5. भविष्यवाणि कर (Prophetic Ministry)

6. प्रबंधक व दान की सेवा कर ( Service of Management & Charity)

etc.....

अगर ऐसा नहीं हुआ है और आप सेवा करने के लिए आँख बंद करके निकल गए तो आपको सख्त प्रार्थना व किसी अभिषेक्त परमेश्वर के दास के परामर्श को ज़रूर लेना चाहिए। पर अगर आपको यक़ीनन परमेश्वर की बुलाहट है तो आप इन बातों से अपने को जाँच सकते हैं 

1. आप अपना पवित्र शास्त्र ज़रूर अध्ययन करेंगे और

2. प्रार्थना में वक़्त व्यतीत करेंगे

3. परमेश्वर की इच्छा से ही एक एक कदम बढ़ाकर सेवा करेंगे अपनी इच्छा से सेवाकाई में आपको बहुत प्रार्थनाओं व परामर्श, प्रशिक्षण व ट्रेनिंग की अवशयकता पड़ेगी। आपको ऐसा लगेगा जैसे हर रूह को बचाना मेरी ज़िम्मेदारी है इस बात को छोड़ अगर कोई और कारण है सेवा में आने का तो आपको सेवा की गंभीरता को समझना पड़ेगा। क्यूंकि सेवाकई कमाने का धंदा नहीं पर सिमित संसाधनों में खुदा की बादशाहत में काम करना है।

4. वचन से ही बात करेंगे वचन से बहार अपने तथ्यों और विचारों को वचन से साबित करने की कोशिश नहीं करेंगे पर वचन को उचित उदहारण सहित समझाना चाहेंगे व प्रचार करेंगे।

5. वचन को और सेवकाई को ढाल बनाकर अपना स्वार्थ पूरा नहीं करेंगे।

6. वचन को खुदा की आवाज़ मानकर ही "सिर्फ" उसी का प्रचार करेंगे वचन में जोड़ना घटाना नहीं करेंगे। पिता पुत्र पवित्रात्मा को एक ही परमेश्वर मानकर सेवा करेंगे।

7. आपके प्रकाशन वचन से ही मेल खाएंगे।

8. आप लोगो के जीवन को सिर्फ और सिर्फ यीशु मसीह की समानता में बनाने में सहायता करेंगे।

9. आप किसी व्यक्तित्व के पाप को उभार कर उसके विरुद्ध ही प्रचार करेंगे उसकी सरहाना नहीं करेंगे ताकि वो पष्टताप कर जीवन बदल सके।

10. लोगों के डर से वचन से समझौता compromise नहीं करेंगे व अपमान और जान के खो जाने का डर से नहीं डरेंगे। र नया सेवक यह काम ज़रूर करे-

1.वचन पढ़े (Read atleast 15 times daily for preaching any topic)

2.उसे समझें (Study it to apply not for knowledge but for a change)

3.प्रार्थना करें (check whether you are regularly praying, क्यूंकि प्रार्थना पवित्र आत्मा निरंतर कराता रहता है)

"जब मैं तेरे धर्ममय नियमों को सीखूंगा, तब तेरा धन्यवाद सीधे मन से करूंगा। मेरी आंखें खोल दे, कि मैं तेरी व्यवस्था की अद्भुत बातें देख सकूं।" Pslam 119

जय मसीह की ✝️✝️♥️♥️

Rev. Vivek Simon Chand 







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